मातृ-पितृ भक्ति गीत
"गीत संगीत हरिओम जोशी "
मुझे इस दुनिया में लाकर बोलना चलना सिखाकर।उपकार किया है जिन्होंने मेरे मात-पिता को वंदन।
जैसे पारवती शिव शंकर।
मैं अबोध बालक जन्मा, पहली शिक्षक थी तुम मां।
आंचल का दूध पिलाकर, पालन पोषण किया मां।।
तूने तन-मन से संवारा तब ही इस योग्य बना मां ।
मुझे इस दुनिया में............
@
जिनके कंधों पर बैठे जिन बाहों में पाया झूला।
बचपन की हर पीड़ा से बचा हुआ सब भूला ।।
दुनिया के कष्ट सह कर बाबुल का फ़र्ज़ निभाया।
उपकार किया है जिन्होंने...........
चरणों में शीष झुका कर जीवन को धन्य मानूं ।
जग में कुलदीप सा दमकूं नवग्रहों में जैसे भानू।।
सेवा कर इन चरणों में अर्पित सुख वैभव सारा
उपकार किया है जिन्होंने.............
No comments:
Post a Comment