आराधना के स्वर
ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है। क्योंकि हम उसी की सृष्टि के एक साकार रूप हैं। इस ब्लॉग में हमने सनातन धर्म से संबंधित त्वरित कृपा फल प्रदान करने वाले सिद्ध संस्कृत स्तोत्र पाठ संकलित किए हैं। इनकी सहायता से आप नित्य उपासना कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
Wednesday, 30 September 2026
Sunday, 27 September 2026
श्री नवग्रह पीडाहर स्तौत्र
श्री नवग्रह पीड़ाहर स्तोत्रम् (संस्कृत एवं हिंदी अर्थ)
1. सूर्य (रवि) प्रार्थना
ग्रहाणामादिरादित्यो लोकरक्षणकारकः ।विषमस्थानसम्भूतां पीडां हरतु मे रविः ॥ १ ॥
अर्थ: ग्रहों में सबसे आदि (प्रथम), संसार की रक्षा करने वाले भगवान सूर्य, जन्मपत्रिका या गोचर में प्रतिकूल (विषम) स्थानों में स्थित होने से उत्पन्न होने वाली मेरी पीड़ा को दूर करें।
2. चन्द्रमा (विधु) प्रार्थना
रोहिणीशः सुधामूर्तिः सुधागात्रः सुधाशनः ।विषमस्थानसम्भूतां पीडां हरतु मे विधुः ॥ २ ॥
अर्थ: रोहिणी नक्षत्र के स्वामी, अमृतमयी स्वरूप वाले, अमृत के समान शरीर वाले और अमृत का ही भोजन करने वाले चंद्रदेव प्रतिकूल स्थानों में होने वाली मेरी पीड़ा का हरण करें।
3. मंगल (कुज) प्रार्थना
भूमिपुत्रो महातेजा जगतां भयकृत् सदा ।वृष्टिकृद्वृष्टिहर्ता च पीडां हरतु मे कुजः ॥ ३ ॥
अर्थ: पृथ्वी के पुत्र, महान तेजस्वी, (अशुभ होने पर) संसार को भयभीत करने वाले तथा वर्षा करने वाले व वर्षा को रोकने वाले मंगलदेव प्रतिकूल स्थानों की मेरी पीड़ा को दूर करें।
4. बुध प्रार्थना
उत्पातरूपो जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युतिः ।सूर्यप्रियकरो विद्वान् पीडां हरतु मे बुधः ॥ ४ ॥
अर्थ: संसार के लिए उत्पात रूप (उलट-फेर करने वाले), चंद्रमा के पुत्र, महान कांति से युक्त, सूर्य के अत्यंत प्रिय और विद्वान बुध ग्रह मेरी पीड़ा को हर लें।
5. गुरु (बृहस्पति) प्रार्थना
देवमन्त्री विशालाक्षः सदा लोकहिते रतः ।अनेकशिष्यसम्पूर्णः पीडां हरतु मे गुरुः ॥ ५ ॥
अर्थ: देवताओं के मंत्री (गुरु), विशाल नेत्रों वाले, हमेशा संसार के कल्याण में लगे रहने वाले और अनेक शिष्यों से घिरे रहने वाले देवगुरु बृहस्पति मेरी पीड़ा का निवारण करें।
6. शुक्र (भृगु) प्रार्थना
दैत्यमन्त्री गुरुस्तेषां प्राणदश्च महामतिः ।प्रभुस्ताराग्रहाणां च पीडां हरतु मे भृगुः ॥ ६ ॥
अर्थ: दैत्यों के मंत्री व गुरु, मृत संजीवनी विद्या से उन्हें जीवन देने वाले, अत्यंत बुद्धिमान और ताराग्रहों के स्वामी भृगुपुत्र शुक्रदेव मेरी पीड़ा को दूर करें।
7. शनि प्रार्थना
सूर्यपुत्रो दीर्घदेहो विशालाक्षः शिवप्रियः ।मन्दचारः प्रसन्नात्मा पीडां हरतु मे शनिः ॥ ७ ॥
अर्थ: सूर्य के पुत्र, विशाल शरीर और बड़े नेत्रों वाले, भगवान शिव के परम प्रिय, मंद गति से चलने वाले और शांत व प्रसन्न आत्मा वाले शनिदेव मेरी पीड़ा का हरण करें।
8. राहु (तम) प्रार्थना
महाशिरा महावक्त्रो दीर्घदंष्ट्रो महाबलः ।अतनुश्चोर्ध्वकेशश्च पीडां हरतु मे तमः ॥ ८ ॥
अर्थ: बड़े सिर वाले, बड़े मुख वाले, तीखे और लंबे दांतों वाले, अत्यंत बलवान, बिना शरीर (धड़) के और ऊपर उठे बालों वाले अंधकार स्वरूप राहु देव मेरी पीड़ा को हरें।
9 केतु प्रार्थना
अनेकरूपवर्णैश्च शतशोऽथ सहस्रशः ।उत्पातरूपो जगतां पीडां हरतु मे शिखी ॥ ९ ॥
अर्थ: सैकड़ों और हजारों रूपों तथा रंगों वाले, संसार के लिए उत्पात स्वरूप, शिखाधारी केतु देव प्रतिकूल स्थानों से उत्पन्न मेरी समस्त पीड़ाओं को दूर करें।
प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर पूजा स्थल पर दीपक प्रज्वलित करें और उपरोक्त स्तोत्र का १ अथवा ११पाठ करें । निश्चित रूप से सफलता प्राप्त होगी।
शिव जी के प्रांत: रात्रि स्मरणीय नाम
प्रांत:
ॐ रुद्राय नमः ॐ काल भैरवाय नमः
ॐ त्र्यंबकेश्वराय नमः।।
प्रतिदिन सुबह उठते ही तीन नामों का स्मरण करना है।
पृथ्वी गायत्री मंत्र
ॐ पृथ्वि देव्ये च विद्महे सहस्र मूर्तये धीमहि तन्नो महिं प्रचोदयात्।। (प्रतिदिन १०८ बार बोलना)
ॐ सर्व सम्मोहन्यै च विद्महे विश्वजनन्यै धीमहि तन्नो शक्ति प्रचोदयात् ।। (१२ बार रोज बोलना)
ॐ पृथ्वीदेव्यै विद्महे ॐ सहस्रमूर्तयै धीमहि तन्नो पृथ्वीः प्रचोदयात् ||
Saturday, 26 September 2026
सूर्याष्टक।रविवार को करें भगवान भुवन भास्कर सूर्य देव आराधना
प्रतिदिन प्रातः काल में सूर्याष्टक भगवान् भुवन भास्कर सूर्य देव को प्रसन्न करने हेतु श्रद्धा पूर्वक इस परम शक्ति शाली सूर्याष्टक का पाठ करने से विपत्तियों का नाश होता है और धन वैभव और ऐश्वर्य के साथ श्रेष्ठ रोजगार दिलवाने में मददगार होता है। अतः। रोजाना सुबह अथवा रविवार को पाठ करने से लाभ मिलता है।
" अथ सूर्याष्टकम् "
आदि देव नमस्तुभ्यं , प्रसीद मम् भास्कर: ।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर। नमोस्तुते ।। १।।
सप्ताश्व रथमारूढं , प्रचंडं कश्यपात्मजं ।
श्वेतपद्माधरं देवम् , तं सूर्य ं प्रणमाम्यहं ।। २ ।।
लोहितं रथमारूढं , सर्वलोक पितामहम् ।
महापाप हरम् देवम् , तं सूर्यं प्रणमाम्यहं ।। ३ ।।
त्रेगुण्यश्च महाशूरं ब्रम्हा विष्णु महेश्वरं ।
महापाप हरम् देवम् तं सूर्यं प्रणमाम्यहं ।।४।।
ब्रम्हितं तेज: पुंजिचिं ,वायुराकाशमेव च ।
प्रभुत्वं सर्वलोकानां तं सूर्यं प्रणमाम्यहं ।।५।।
बंधूकपुष्पसंकाशं , हारकुण्डल भूषितं ।
एकचक्र धरम देवम् तं सूर्यं प्रणमाम्यहं ।। ६ ।।
तं सूर्यं लोक कर्तारं , महातेज प्रदीपनम् ।
महापाप हरम् देवम् तं सूर्यं प्रणमाम्यहं ।। ७ ।।
तं सूर्यं जगतांनाथम् , ज्ञान प्रकाश मोक्षदम् ।
महापाप हरम् देवम् तं सूर्यं प्रणमाम्यहं। । ८ ।।
:- फलश्रुति :-
सूर्याष्टकम् पठेनित्यं , ग्रह पीड़ा प्रणाशणं ।
अपुत्रों लभते पुत्रं , दारिद्रो धनवान भवेद् ।। ९।।
स्त्री तेल मधु मांसानि यतजेत रवैर्दिने ।
न व्याधि शोक दारिद्रयं सूर्य लोकम स गच्छति।।१०।।
Tuesday, 15 September 2026
Thursday, 3 September 2026
दाढ़ दांत दर्द झाड़ा
ॐ नमो आदेश गुरु का वन में ब्याही अंजनी जिन्हें जाया हनुमंत।
कीड़ा मुकड़ा माकड़ा तीनों भष्मंत।
गुरु की शक्ति मेरी भक्ति फुरो मंत्र ईश्वरों वाचा।
नीम की डंडी को दर्द वाली जगह स्पर्श कर इक्कीस बार मंत्र बोलना चाहिए।
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