Sunday, 3 May 2026

सूर्याष्टक।रविवार को करें भगवान भुवन भास्कर सूर्य देव आराधना

   प्रतिदिन प्रातः काल में सूर्याष्टक भगवान् भुवन भास्कर सूर्य देव को प्रसन्न करने हेतु श्रद्धा पूर्वक इस परम शक्ति शाली सूर्याष्टक का पाठ करने से विपत्तियों का नाश होता है और धन वैभव और ऐश्वर्य के साथ श्रेष्ठ रोजगार दिलवाने में मददगार होता है। अतः। रोजाना सुबह अथवा रविवार को पाठ करने से लाभ मिलता है।
   
                 अथ सूर्याष्टकम् " 

आदि देव नमस्तुभ्यं  , प्रसीद मम्  भास्कर: ।
दिवाकर नमस्तुभ्यं     प्रभाकर।     नमोस्तुते   ।। १‌‌।।

सप्ताश्व रथमारूढं  ,  प्रचंडं    कश्यपात्मजं  ।
श्वेतपद्माधरं  देवम्  ,  तं   सूर्य ं प्रणमाम्यहं   ।।  २ ।। 

लोहितं रथमारूढं  ,  सर्वलोक पितामहम्  । 
महापाप हरम् देवम् , तं सूर्यं प्रणमाम्यहं   ।। ३ ।।  

त्रेगुण्यश्च महाशूरं  ब्रम्हा विष्णु महेश्वरं ।
महापाप हरम् देवम् तं सूर्यं प्रणमाम्यहं ।।४।। 

ब्रम्हितं तेज: पुंजिचिं ,वायुराकाशमेव च  ।  
प्रभुत्वं  सर्वलोकानां  तं सूर्यं प्रणमाम्यहं ।।५।। 
बंधूकपुष्पसंकाशं , हारकुण्डल भूषितं ।
एकचक्र धरम देवम् तं सूर्यं प्रणमाम्यहं ।। ६ ।।

तं सूर्यं लोक कर्तारं  , महातेज प्रदीपनम् ।
महापाप हरम् देवम् तं सूर्यं प्रणमाम्यहं  ।। ७ ।।

तं सूर्यं जगतांनाथम् , ज्ञान प्रकाश मोक्षदम् ।
महापाप हरम् देवम् तं सूर्यं प्रणमाम्यहं। । ८ ।।
                       :-  फलश्रुति  :- 
सूर्याष्टकम् पठेनित्यं  , ग्रह पीड़ा प्रणाशणं  ।
अपुत्रों  लभते पुत्रं  , दारिद्रो धनवान भवेद्  ।। ९।।

स्त्री तेल मधु मांसानि यतजेत रवैर्दिने  ।
न व्याधि शोक दारिद्रयं सूर्य लोकम स गच्छति।।१०।।

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