कुल संरक्षिणी माता कौलिक ज्ञान प्रकाशिनी।।१।।
वंदे श्री कुल पूज्या तां कुलांबां कुलक्षिणी,
वेदमाता जगनमाता लोकमाता हितेषिनी।। २।।
आदिशक्ति समुद्भूता त्वया ही कुल स्वामिनी,
विश्व वंद्यां महाघोरां त्राहिमाम् शरणागत: ।।३।।
त्रैलोक्य हृदयं शोभे देवी त्वं परमेश्वरी ।
भक्तानुग्रह कारिणी कुलदेवी नमोस्तुते।।४।
महादेव प्रियंकरी बालाना हितकारिणी।
कुल वृद्धि करिमाता त्राहिमाम शरणागतम् ।।५।।
चिदग्निमंडल संभुता राज्य वैभव कारिणी।
प्रकटीतां सुरेशानी वंदे त्वाम् कुलगौरवां।।६।।
त्वदीये कुले जात: त्वमेव शरणं गत: ।
त्वत वत्सलोहं आद्ये त्वम रक्षा रक्षा धुना ।।७।।
पुत्रं देहि धनंदेहि साम्राज्यं प्रदेहि मे
सर्वदास्माकं कुले भूयात मंगलानु शाशनमृ ।।८।।
कुलाष्टक मिदंपुण्यं नित्यं यह: सुकृति पठेत्
तस्य वृद्धि कुले जात: प्रसन्ना कुलेश्वरी।।९।।
कुलदेवी स्तोत्र मिदं सूपुण्यंललितं तथा ।
अर्पयामिभक्तभक्तया त्राहिमाम शिव गेहिनी।।११।
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