Monday, 9 December 2024

ब्याव री पंगत

दादा जी आपणा सगला घरातियां ने बताबा लागर्ब्याया हा 
गांव री पंगत में जानो है । लारला गाव सू न्योतो आयो छे। पीबा ने पाणी रो लौट्यो सागे लेई ने चाल जो 
पोतो बोल्यो : पर दादा जी । लारलो गांव तो घणो दूरा है। अठेऊं से पगां पगां भूखा जावां फेर खाई पी ने फेर आवेलां तो खायो पीयो तो पेट में ही पच जासी ।
तै खातिर ही तो बोलूं हूँ । पाणी रा लोटा मायने कोई साग भर लीजो कोई बरफी पुडी नमकीन बूंदी फेर घरे आई ने खा ली जो।
हां या बात तो चोखी छे। 
सबने अपने अपने लौटे ले लिए और पास के गांव में पैदल पैदल जीमने की रसोई खाने पहुंच गये।
पत्तलों में जो परोसा जाता अपने लौटे में भरते जाते।
दूर से कुछ लोग उनकी हरकतें देखते और आपस में इशारा करते थे। 
खाना चोरी करते रंगे हाथों पकड़े जाते।
और फिर मजाक बन जाती थी।

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अपना घर बनवाने का मंत्र

ॐ श्री वराह धरनी धराय नमः। प्रातः काल उठकर सात बार बोलना है।  एक महीने में मकान बनने का काम शुरू हो जाए गा