Sunday, 12 November 2023

गृह-प्रवेश प्राचीन भारतीय विधि

प्राचीन काल में भारत के किसी भी नवीन निर्मित ग्राहक को प्रवेश करने से पूर्व मकान पर झंडिया लगाने तथा त्रिशूत्रीकरण करके वस्तु को भूमि में स्थापना करके बाद में गृह प्रवेश किया जाता था गृह प्रवेश के लिए अपने पुराने घर से चाहे वह किराए पर ही कहीं रह रहा हो उसे जगह का जल वहां से कल देवताओं को गंध अक्षत पूजन करके लाइन तिजोरिया अन्य बॉक्स कुछ सामान लेकर मंगल गीत एवं वाद्य यंत्रों सहित ग्रह में प्रवेश करें घर में जल कलश सहित गृह लक्ष्मी यजमान की पत्नी प्रवेश करें यह मुहूर्त दिन या रात्रि को भी हो सकता है इसके बाद चूल्हा चक्र पलंग तिजोरी चक्की गूगल मुसल वह अन्य वस्तुओं की पूजन कारण इसके बाद गृह स्वामी सब पत्नी वास करें जाति भजन बंधु भोज ब्राह्मण भोज कन्या भोजन कारण गायों को चार कबूतरों को अन्य दान का संकल्प करें ब्राह्मणों को भुइया सी दक्षिण तथा आचार्य अन्य ब्राह्मणों को शिल्पी कारीगर को सम्मान सहित वस्त्र दिए एवं दक्षिण प्रदान करें
              ।।इति गृह प्रवेश विधानम् ।।
गृह प्रवेश के पहले गृह स्वामी को भूमि शुद्धि हेतु 57 ब्राह्मणों द्वारा 357 दिन पहले शुभ दिन में वास्तु के जब आरंभ करने चाहिए जिस तरह यज्ञ प्रारंभ करने के पहले जल यात्रा करके कलश स्थापित करते हैं इस तरह से यह कार्य भी किया जाता है गृह प्रवेश के पहले दिन रात्रि में नवग्रह हवन शांति वास्तु पूजन योगिनी क्षेत्रपाल सर्वतोभद्र मंडल देवताओं का पूजन विधान ब्रह्म आचार्य वरुण इत्यादि कम द्वारा किया जाता है आवाहित देवताओं की को आहुति वास्तु के जब की दशांश की आहुति बिल्व पत्र सहित दिलाए श्री सूक्त से लक्ष्मी हवन करें वस्तु की मूर्ति गिरगिट की तरह की शीशे की या स्वर्ण की बनवाएं लक्ष्मी की चांदी की विष्णु की स्वर्ण की शिव की तांबे की बनवाएं वास्तु यंत्र 81 खानों का भी चांदी का बनवा सकते हैं दूसरे दिन प्रातः घर को सजा बांधने वाले बंदे द्वार पर तोरण लगाए घर में अन्य सुविधाओं के समान चूल्हा तिजोरी पलंग चकिया और कल मौसम मिक्सी ईमान दस्ता आदि मंगवाकर स्थापित कर देते हैं सुबह गणपति स्मरण करके जल यात्रा के लिए औरतें हुए या बोरिंग पर जल लाने के लिए मंगल गीत गाती हुई वाद्य यंत्रों के साथ जाती हैं वहां पर वरुण पूजा जल मंत्र का स्थल मंत्र का कीचड़ मंत्र का इत्यादि की योगिनी क्षेत्रपाल की गणेश आदि की पूजा कर करहुए या बावड़ी या बोरिंग से जल कलशो में भरते हैं कलश एक दो तीन पांच सात नौ हो सकते हैं तीन के विषय में शंकर रहती है कलशो पर स्वास्तिक चिन्ह लगाओ वस्त्र वेस्टर्न करें पत्र पुष्प माला नई खेल सहित सजा ध्यान रखें खाली कलश पर घर पर नहीं लेकर आए अन्य स्थान से भी कोई पर पहुंचाएं यजमान सब पत्नी पूजा कर कर जल कलश अपने स्त्री को देने औरतें सब कलशो को लेकर आए आचार्य मार्ग में चौराहे पर भैरव गली क्षेत्रपाल बलि प्रदान करें गृह में प्रवेश समय द्वारा दिल्ली द्वारा शाखा तोरण की पूजा करें सुहासिनी को नेक देकर गृह प्रवेश करें इसके बाद घर में सुहासिनी या सुभाष नहीं द्वारा उन कलशो को जल स्थान पर अक्षत जो गेहूं रखी हुई जगह पर रखें आजकल इस तरह जल यात्रा पूर्वक कलश लाने को ही गृह प्रवेश मानने लग गए हैं जबकि प्राचीन विधान अलग है इस समय जूली चक्र की पूजा वरुण पूजा पलंग पर कामदेव की चक्की में भादरा की लोकल में भक्ति मौसम में बलभद्र की तिजोरी में कुबेर की कोठियां में नाग मंत्र की पूजा कर देते हैं प्रधान दिन चूल्हे पर कढ़ाई नहीं चढ़ाई हरी सब्जी बनाएं दूध उबालना चाहिए

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