Friday, 13 March 2026

इनमें से कुछ नहीं होकर भी । तुम मेरी सब-कुछ हो ।।

            कुछ नहीं होकर भी सब-कुछ हो 
ना तुम मेरी पत्नी 
बीवी भाभी हो ना प्रेमिका हो ना मां बहन बेटी बहू बुआ मौसी मामी चाची ताई नानी दादी।
कुछ भी तो नहीं हो 
ना ही तुम को मुहब्बत में देखा है ना ही आंखों में परखा है।
बस इतना ज्ञात है मुझे कि तुम एक स्त्री /नारी /औरत/ महिला हो ।
तुम्हारी सुंदरता भरी इन आंखों में न क्रोध है ना प्रेम है ना घृणा है । फिर भी एक आकर्षण है जो मुझे अपनी ओर आकर्षित करती हैं और यह एहसास कराती है कि 
कुछ ना होकर भी  
मेरी  
सब-कुछ हो 
आखिर  तुम कौन हो? 
आसमां से उतरी  कोई अप्सरा से कम नहीं।
परियों की शहजादी  से  भी अधिक सुंदर हो कहीं  
तीनों  लोकों में भी शायद  तुम्हारे  जैसा कोई नहीं ।
 चित्रकार  की कल्पना से भी अधिक सुंदर हो ।
पत्थर पर तराशी हुई मूर्ति  में  साकार हो।
उससे भी कहीं अधिक मेरी कल्पनाओं में दिखाई देती हो ।
तुम वही हो जिसकी मैं आराधना करता हूं ।
क्यों कि  तुम ही मेरी आराध्य देवी हो ।
कोई तुम्हें  अंबे कहे  
लक्ष्मी सरस्वती काली कहे  
तुम सब रूपों में हो  सब स्वरूपिणी हो  
 मैं हर पल  तुम्हें  ही  ध्यान  धरूं 
 आदिशक्ति  श्री अंबिका  तुम्हें नमन करूं । 

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