ग़ज़ल:-
फिर कभी हमको दीदार से ,
हर्षा आएगा ।।
आइएगा लौट कर........
कुछ ही लम्हे मिले हमको हमें आप मिले ।
अपने क़दमों से इस दर को नवाजिएग।।
आइएगा......
इस मुलाकात के बीते हुए लम्हों की कसम।
हमने पाई जो खुशी दोहराइएगा।।
आइएगा
महफिले दौर ने जो राह दिखाई हमको।
उस को तारीख़ में सच कर के दिखलाइएगा।।
ममममममममममममममममममममममममममममम
ग़ज़ल -2
ना हम बेवफा ना तुम बेवफा ।
ऐ सनम् वक्त ने की ये खता।।
हमारे दिलों में चाहत वही है
ज़माने को इसका क्या पता।।
मुहब्बत अगर दिल की गहराई में है।
कोई ना सकेगा इस को मिटा।।
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